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    डिप्रेशन क्या है: अवसाद के लक्षण और डिप्रेशन से छुटकारा पाने के तरीके (Depression Meaning in Hindi)

    आजकल लोग अपनी रोज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इतना व्यस्त है कि उनके पास अपने खुद के लिए ही समय नहीं है साथ ही बहुत से लोग जरा जरा सी बातों पर बहुत अधिक चिंतित होने लगते है वैसे तो किसी भी व्यक्ति का चिंता करना एक सामान्य सी बात है पर अगर इसकी वजह से वह व्यक्ति जरुरत से ज्यादा ही तनाव लेता है और बहुत लम्बे समय तक उसी के बारे में सोचता रहता है तो यह सामान्य बात नहीं है क्योंकि ऐसे व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकते है। वास्तव में डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक स्थति है, जो कुछ लोगों को तो थोड़े समय के लिए ही रहती है थो कुछ लोगो में काफी लंबे समय तक रहती है और एक समय बाद उन लोगों का यही डिप्रेशन एक भयानक रूप भी ले लेता है, इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है और उस इंसान का मन किसी भी काम में नहीं लगता और वह व्यक्ति अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है जिसके कारण उनकी रोजमर्रा की ज़िंदगी और उसके कामकाज में बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए डिप्रेशन के बारे में समझना और उससे कैसे बाहर निकलना है ये तरीका हमे पता होना चाहिए जिससे हम अपनी और अन्य लोगो की मदद कर सकें।

     

    चिंता या तनाव क्या है (तनाव और डिप्रेशन में अंतर )


    डिप्रेशन को समझने से पहले हमें ये समझना होगा की चिंता या तनाव क्या होता है। आइए जानते है तनाव क्या है

    तनाव एक ऐसी स्थति है जो कि कुछ भौतिक और मानसिक कारकों की वजह से होती है जब किसी व्यक्ति का जीवन उसके द्वारा सोची गयी योजना के अनुसार नहीं चलता है। चाहे वह एक अच्छी नौकरी का न होना (तनावभरी नौकरी होना), परिवार से सम्बंधित परेशानी, पढ़ाई या किसी काम को लेकर ज्यादा सोचना या अन्य कोई और वजह, हम सभी ने कभी न कभी, किसी चीज को लेकर तनाव के कुछ लक्षणों का अनुभव जरूर किया है, पर ज़्यादातर लोग तनावमुक्त इसलिए नहीं हो पाते कि क्योकि उन्हें पता ही नहीं होता कि वे तनावग्रस्त हैं।

     

    आइये जानते है तनाव के समय दिखाई देने वाले कुछ लक्षण हैं और तनाव में लोग कैसा महसूस करते है?

     

    तनाव के लक्षण (अवसाद के लक्षण)


    जब नीचे दिए गए लक्षण आपको लम्बे समय तक दिखते है तो आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते है इसलिए जल्द से जल्द किसी अच्छे मनोचिकित्सक से मिलें और उसके द्वारा बताये गए टेस्ट जरूर करवाएं।

     

    • छोटी छोटी बातों पर अधिक गुस्सा आना
    • ध्यान केंद्रित करने और याद रखने में कठिनाई होना
    • नींद न आना
    • अधिक नकारात्मक विचार आना
    • अकेले रहने का मन करना
    • थकान और कमजोरी महसूस करना
    • चिड़चिड़ापन रहना
    • पेट का फूलना – दस्त, कब्ज और उल्टी की शिकायत
    • दर्द (सीने में दर्द सहित) और तेजी से दिल की धड़कन
    • मन में अजीब से विचार आना
    • भूख में कमी
    • खाने का सही से न पचना
    • छोटी-छोटी चीजों को लेकर अधिक सोचना
    • सिरदर्द
    • आत्मविश्वास की कमी


    वैसे तो, तनाव के लक्षण कुछ समय के लिए ही होते है और इसका समय हमें होने वाली समस्या या चिंता की वजह पर निर्भर करता है साथ ही, हम उस समस्या के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। वैसे देखा गया है की थोड़ा तनाव लेना तो अच्छा हो सकता है जो की हमारे लिए एक बूस्टर की तरह का काम करता है, जैसे आपके जीवन में आपको प्रोत्साहित करना, आप में प्रेरणा को बढ़ावा देना, ध्यान केंद्रित करने में सहायता करना, उत्पादकता और विकास को बढ़ाना है। पर जरुरत से ज्यादा तनाव लेना हमारी सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

     

    तनाव लेना कोई बीमारी नहीं है पर अगर हम अपनी चिंता को समय पर नियंत्रित नहीं करते है तो ये धीरे-धीरे बीमारी और अन्य बहुत सी बीमारियो की जड़ बन सकता है।

     

    आइए जानते हैं अवसाद / डिप्रेशन क्या है (Depression Meaning in Hindi )


    तनाव की तुलना में अवसाद एक गहरी और अधिक गहन ‘स्थिति’ है और इसका शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है अगर किसी को चिंता या तनाव अधिक समय तक रहता है तो चिंता अवसाद का रूप ले लेती है। जिसके कारण वह व्यत्कि लंबे समय तक (कभी-कभी महीनों या वर्षों तक) परेशान रहने लगता है, नाखुश या लोगो से दूर रहता है और अकेले रहना ज्यादा पसंद करता है। इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है, उस व्यक्ति की उन सभी गतिविधियों में रुचि ख़त्म हो जाती है जिसमे वह सामान्य रूप से आनंद लेता हैं, उस इंसान की रोजमर्रा की ज़िंदगी, कामकाज और व्यवहार पर बुरा प्रभाव पड़ता है और बहुत से बदलाव देखने को मिल सकते है।


    दरअसल, अवसाद आज दुनिया में लोगो में होने वाला चौथा सबसे बड़ा रोग है, और 2020 तक इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है। WHO के अनुसार, भारत के लोग आज दुनिया में सबसे अधिक अवसाद से पीड़ित है।

     

    जब भी आपको खुद में या अपने किसी प्रिजन में डिप्रेशन के लक्षण दिखाई दे तो आप डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए नीचे दिए गए कुछ उपायों को अपना सकते है अगर आपको फिर भी कोई फर्क नहीं दिखता तो जल्द से जल्द किसी अच्छे मनोचिकित्त्सक से मिले और अपने टेस्ट कराये।

     

    डिप्रेशन कैसे होता है (डिप्रेशन के कारण )


    इसके पीछे कोई सटीक जवाब नहीं है और अभी तक ये स्पष्ट रूप से नहीं बताया जा सका है कि डिप्रेशन किस कारण से होता है, क्योकि किसी व्यक्ति को चिंता होना सामान्य है और वो किसी भी वजह से हो सकती है। विशेषज्ञो का मानना है कि एक व्यक्ति के डिप्रेशन में आने के पीछे कई चीज़ों की अहम भूमिका होती है।

     

    जैसे: अपने भविष्य को लेकर जरुरत से ज्यादा ही सोचना, व्यवसाय में घाटा होना, काम का दबाव, किसी नज़दीक़ी की मृत्यु, अच्छी नौकरी न होना या नौकरी चले जाना, ब्रेकअप होना या शादी का टूट जाना जैसे अन्य बहुत सी वजहों को लेकर एक व्यक्ति जरुरत से ज्यादा सोच कर डिप्रेशन में जा सकता है। काफी बार देखा गया है की हम जिस चीज को लेकर चिंता कर रहे है वो असल में चिंता की वजह है ही नहीं, या चिंता की वजह असल में कोई और ही है इसलिए जब भी आप चिंतित हो या आपको डिप्रेशन के लक्षण देखे तो सबसे पहले उसके पीछे असली वजह क्या है उसका पता करें।

     

    डिप्रेशन के समय क्या करें।

     

    1. यदि आपको अपने आप में डिप्रेशन के लक्षण दिखाई दे रहे है, तो सबसे बेहतर होगा की आप किसी अच्छे मानसिक पेशेवर चिकित्सक की सहायता लें और उसके साथ अपनी स्थिति को साझा करें।

    2. अगर आप डिप्रेशन से बाहर आना चाहते है, तो आप अपने तनाव की असली वजह जानें और फिर खुद से सवाल करें कि आप इस स्थति से कैसे बाहर निकल सकते हैं। क्योकि डिप्रेशन में आपकी लड़ाई खुद से होती है और यह आपके द्वारा ही मानसिक रूप से पैदा की हुई बीमारी है इसलिए इससे कैसे बाहर निकलना है इसके बारे में आपसे बेहतर कोई और नहीं जान सकता।

    3. “अपनी पुरानी बीती बाते” या “आने वाले कल” के बारे में सोच-सोच कर हम अपनी परेशानियों को और भी बढ़ा देते है, इसलिए बेहतर होगा कि हम आज के बारे में ही सोचे और अपने आज को ही बेहतर बनाने कोशिश करें क्योंकि अगर हमारा आज अच्छा होगा तो कल अपने आप अच्छा बन जायेगा।

    4. दबाव या अपने तनाव को दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप अपनी पसंद के गाने सुनें इससे आपको मेहसूस होने वाले तनाव में कमी आती है और इससे आप खुद को तरोताज़ा महसूस करते है ।

    5. इंसान अक्सर अपने डिप्रेशन को कम करने के लिए ड्रग्स, शराब, और अन्य नशीले पर्दार्थो का सहारा लेना शुरू कर देता है। ऐसा करने से हो सकता है की आप कुछ समय तक के लिए उस तनाव से दूर रह सकते है, लेकिन धीरे- धीरे आपको नशा करने की आदत बन जाती है जिससे आप मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हो, इसलिए इंसान को डिप्रेशन के समय नशीली चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए।

    6. डिप्रेशन के समय आपको खुद को उत्साहित करना चाहिए ऐसा करने से आपको, अपने तनाव को काबू में करने के लिए मदद मिलेगी।

    7. क्या आप जानते है की बहुत से वैज्ञानिक शोध में ये साबित हो चुका है कि व्यायाम या योग आपके डिप्रेशन (अवसाद) को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है। योग और व्यायाम हमारे दिमाग़ को स्थिर करने का काम करते हैं। जिससे हमारे डिप्रेशन को बढ़ाने वाले नकारात्मक विचार आने कम हो जाते है।

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